लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 360

Reading 371 of 516 · Source nos. 4160–4171 · Source PDF 377

1श्रीकृष्ण भक्ति हित गोविंद राधे।

2गुरु की शरण अनिवार्य बता दे॥ 4160॥

3कृष्ण के समान ही गोविंद राधे।

4गुरु को माने करे सेवा बता दे॥ 4161॥

5हरि माहात्म्यज्ञान गोविंद राधे।

6साधक को प्रथम अनिवार्य बता दे॥ 4162॥

7माहात्म्यज्ञान बिनु गोविंद राधे।

8जो प्रेम हो निज सुख का बता दे॥ 4163॥

9कामी तो यही कहे गोविंद राधे।

10मैं तो तेरा ही सुख चाहूँ बता दे॥ 4164॥

11किन्तु शत प्रतिशत गोविंद राधे।

12निज प्रिय को दे धोखा बता दे॥ 4165॥

13अतएव भक्तों को गोविंद राधे।

14माहात्म्य ज्ञान रह विरह में बता दे॥ 4166॥

15संयोग आनन्द गोविंद राधे।

16मन बुद्धि को आनन्द में डुबा दे॥ 4167॥

17याते संयोग में तो गोविंद राधे।

18माहात्म्य ज्ञान रहे ना बता दे॥ 4168॥

19भावनिर्माण में तो गोविंद राधे।

20वस्तु विषय ज्ञान कारण बता दे॥ 4169॥

21ऐसे ही प्रेम में भी गोविंद राधे।

22ज्ञान का होना अनिवार्य बता दे॥ 4170॥

23उत्तम जान के ही गोविंद राधे।

24हम कछु भी चाहते हैं बता दे॥ 4171॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

Source edition and PDF · Text version