Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 359
Reading 370 of 516 · Source nos. 4148–4159 · Source PDF 376
1भक्त आगे चक्री चलें गोविंद राधे।
2पीछे शिव बायें चलें वरुण बता दे॥ 4148॥
3भक्त दायें इन्द्र चलें गोविंद राधे।
4भक्त राधे राधे राधे नाम सुना दे॥ 4149॥
5भक्तों में दो गुण गोविंद राधे।
6कृष्णनिष्ठा जगतृष्णात्याग बता दे॥ 4150॥
7भक्ति में श्रद्धा का गोविंद राधे।
8स्थान है सबते प्रमुख बता दे॥ 4151॥
9भक्ति में कृष्ण तत्व गोविंद राधे।
10परिज्ञान परमानिवार्य बता दे॥ 4152॥
11भक्ति में कृष्ण प्रति गोविंद राधे।
12भाव अनन्य अनिवार्य बता दे॥ 4153॥
13भक्ति में निष्काम गोविंद राधे।
14भाव का होना मुख्य है बता दे॥ 4154॥
15भक्ति में पाँचों मुक्ति गोविंद राधे।
16भक्त हित सर्वथा त्याज्य बता दे॥ 4155॥
17दंभी भक्त ही माँगे गोविंद राधे।
18भक्ति ते भुक्ति या मुक्ति बता दे॥ 4156॥
19मायिक सुख सब गोविंद राधे।
20राजसी, तामसी भक्ति बता दे॥ 4157॥
21मुक्ति का सुख है गोविंद राधे।
22सात्विकी भक्ति ही भक्त को बता दे॥ 4158॥
23निर्गुण शुद्ध भक्ति गोविंद राधे।
24कृष्ण सुखार्थ ही होती बता दे॥ 4159॥