Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 356
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1हरि हरिजन भक्ति गोविंद राधे।
2मायातीत दिव्य गोलोक दिला दे॥ 4112॥
3मायिक जन भक्ति गोविंद राधे।
4स्वर्ग नरक मृत्युलोक दिला दे॥ 4113॥
5तीन भक्ति मायिक हैं गोविंद राधे।
6तमोगुणी अर्थार्थी भक्त बता दे॥ 4114॥
7रजोगुणी जिज्ञासु गोविंद राधे।
8सत्वगुणी आर्त है भक्त बता दे॥ 4115॥
9आलम्बन हरि गोविंद राधे।
10याते उपर्युक्त सुकृती बता दे॥ 4116॥
11किन्तु शुद्ध भक्त तो हैं गोविंद राधे।
12हरि को प्राणाधिक प्यारे बता दे॥ 4117॥
13अनुकूल प्रतिकूल गोविंद राधे।
14दोनों भाव की भक्ति हरि ते मिला दे॥ 4118॥
15सिद्धान्त अनुकूल की गोविंद राधे।
16भक्ति ही भक्ति है शुद्ध बता दे॥ 4119॥
17श्रीकृष्ण प्राप्ति ते गोविंद राधे।
18भक्त हो पूर्ण निर्ग्रन्थ बता दे॥ 4120॥
19निर्ग्रन्थ अर्थ एक गोविंद राधे।
20अविद्याग्रंथि ते रहित बता दे॥ 4121॥
21निर्ग्रन्थ अर्थ दूजा गोविंद राधे।
22शास्त्र विधि ते जो हो रहित बता दे॥ 4122॥
23श्रीकृष्ण प्राप्ति ते गोविंद राधे।
24भक्त को पूर्ण ब्रह्मज्ञान हो बता दे॥ 4123॥