Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 355
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1इन्द्रिय मन बुद्धि गोविंद राधे।
2सबते करे कृष्ण भक्ति बता दे॥ 4100॥
3जो न हरि लीला सुने गोविंद राधे।
4वह कान साँप की ज्योँ बिल है बता दे॥ 4101॥
5जो न हरि नाम गावे गोविंद राधे।
6वह जीभ मेढकी की टर्र ज्यों बता दे॥ 4102॥
7जो न हरि गुरुपद गोविंद राधे।
8झुके वह सिर तनु बोझ बता दे॥ 4103॥
9जो न करे हरि गुरु गोविंद राधे।
10सेवा वह कर शव का है बता दे॥ 4104॥
11जो न लखे हरि गुरु गोविंद राधे।
12वह नैन मोर पंख सम है बता दे॥ 4105॥
13जो न हरि गुरु धाम गोविंद राधे।
14जाय वह पग वृक्ष सम है बता दे॥ 4106॥
15जो न हरि नाम गा के गोविंद राधे।
16हृदय पिघले वह वज्र बता दे॥ 4107॥
17जो न गुरु पद रज गोविंद राधे।
18धारे वह तनु जनु शव है बता दे॥ 4108॥
19जो न हरि गुन गा के गोविंद राधे।
20आँसू बहावे वह अन्धा बता दे॥ 4109॥
21नेत्रों का फल यह गोविंद राधे।
22श्यामा श्याम रूप रस पान करा दे॥ 4110॥
23जिसकी भी भक्ति करो गोविंद राधे।
24उसका ही फल मिले अन्त में बता दे॥ 4111॥