Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 350
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1भक्ति ते जो भक्ति मिले गोविंद राधे।
2उसी भक्ति के वश श्याम बता दे॥ 4040॥
3भक्त दे चुनौती हरि गोविंद राधे।
4उर ते निकले तो जानें बता दे॥ 4041॥
5हरि गुरु कृपा ते ही गोविंद राधे।
6श्रीकृष्ण दिव्य भक्ति मिलेगी बता दे॥ 4042॥
7तप ते ना यज्ञ ते ही गोविंद राधे।
8संन्यास ते ना मिले भक्ति बता दे॥ 4043॥
9अग्नि जल सूर्य आदि गोविंद राधे।
10आराधना ते मिले भक्ति ना बता दे॥ 4044॥
11चारों वेदों के गोविंद राधे।
12ज्ञान ते भी मिले नहिं भक्ति बता दे॥ 4045॥
13गुरु की प्रपत्ति अरु गोविंद राधे।
14सेवा अरु सत्संग भक्ति दिला दे॥ 4046॥
15गुरु है प्रत्यक्ष गोविंद राधे।
16याते गुरुकृपा भी है सुलभ बता दे॥ 4047॥
17मेघ का काम जैसे गोविंद राधे।
18भूमि पै जल बरसाना बता दे॥ 4048॥
19ऐसे ही गुरुकार्य गोविंद राधे।
20बिनु कारण कृपा करना बता दे॥ 4049॥
21कपट रहित होके गोविंद राधे।
22हरि गुरु सेवा में ही मन को लगा दे॥ 4050॥
23हरि गुरु सेवा ही गोविंद राधे।
24जीव का एक उद्देश्य बता दे॥ 4051॥