Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 349
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1चराचर कोई जीव गोविंद राधे।
2हरि भक्त हो तो सर्व पूज्य बता दे॥ 4028॥
3हरि में रमा हो मन गोविंद राधे।
4वह चाण्डाल भी है पूज्य बता दे॥ 4029॥
5भक्तिहीन ब्रह्मा ते गोविंद राधे।
6भक्त चाण्डाल है पूज्य बता दे॥ 4030॥
7भक्ति युक्त चाण्डाल गोविंद राधे।
8योग, यज्ञ, तप सब कर चुका बता दे॥ 4031॥
9भक्तियुक्त चाण्डाल गोविंद राधे।
10भगवान का है प्राण प्यारा बता दे॥ 4032॥
11द्विज बारह गुणयुक्त गोविंद राधे।
12प्रिय नहिं हरि का अभक्त बता दे॥ 4033॥
13विप्र के बारह गुण गोविंद राधे।
14धर्म, सत्य, दम, अरु लज्जा बता दे॥ 4034॥
15तितिक्षा, अमत्सर गोविंद राधे।
16असूया, हीनता, दान बता दे॥ 4035॥
17यज्ञ अरु धृति अरु गोविंद राधे।
18वेद अध्ययन गुण बारह बता दे॥ 4036॥
19श्वपच भी भक्त हो तो गोविंद राधे।
20कोटि कर्मी ज्ञानी ते भी श्रेष्ठ बता दे॥ 4037॥
21हरि कहे भक्तिहीन गोविंद राधे।
22विधि हरि हर मोहिं प्रिय ना बता दे॥ 4038॥
23कर्म, योग, ज्ञान अरु गोविंद राधे।
24भगवान ते भी भक्ति बड़ी है बता दे॥ 4039॥