Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 347
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1जिस ज्ञान ते हो गोविंद राधे।
2कृष्ण तत्वज्ञान वह ग्राह्य बता दे॥ 4004॥
3भक्ति मार्ग में भी पूर्व गोविंद राधे।
4जीव हरि तत्वज्ञान श्रवण बता दे॥ 4005॥
5ज्ञान योग कर्म आदि गोविंद राधे।
6गुणों ते उत्पन्न सगुण बता दे॥ 4006॥
7जीव ब्रह्म एकत्व गोविंद राधे।
8कैवल्य ज्ञान भी सगुण बता दे॥ 4007॥
9श्रवण कीर्तनादि भक्ति गोविंद राधे।
10तीनों गुणों ते परे निर्गुण बता दे॥ 4008॥
11ज्ञान का प्राकट्य गोविंद राधे।
12सत्व गुण ते ही हो शास्त्र बता दे॥ 4009॥
13किन्तु हरि भक्ति तो गोविंद राधे।
14भक्ति ते ही हो प्रकट बता दे॥ 4010॥
15श्रीकृष्ण भक्ति तो गोविंद राधे।
16स्वरूप शक्ति की वृत्ति बता दे॥ 4011॥
17स्वरूप शक्ति में गोविंद राधे।
18तीनों गुणों का प्रवेश ना बता दे॥ 4012॥
19उत्तमा भक्ति तो गोविंद राधे।
20शुद्ध दिव्य चित् रूपा भक्ति है बता दे॥ 4013॥
21निष्काम साधन भी गोविंद राधे।
22भक्ति दिलाने में शक्य ना बता दे॥ 4014॥
23धर्म अर्थ काम मोक्ष गोविंद राधे।
24जन्य सुख हरि दें तुरत बता दे॥ 4015॥