Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 346
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1दूसरा है प्रेम श्रेष्ठ गोविंद राधे।
2जिसका नाम है केवल बता दे॥ 3992 ॥
3विधि मार्ग गामी का गोविंद राधे।
4प्रेम महिमा ज्ञान युक्त है बता दे॥ 3993॥
5राग मार्ग गामी का गोविंद राधे।
6प्रेम है केवल या शुद्ध बता दे॥ 3994॥
7भक्ति में उपाधि दो हैं गोविंद राधे।
8एक है निज सुख कामना बता दे॥ 3995॥
9निज सुख कामना के गोविंद राधे।
10भेद दो हैं एक भोग कामना बता दे॥ 3996॥
11निज सुख वांछा दूजी गोविंद राधे।
12पाँचों प्रकार के मोक्ष बता दे॥ 3997॥
13भक्ति में उपाधि दूजी गोविंद राधे।
14कर्म, योग, ज्ञानादि मिश्रण बता दे॥ 3998॥
15कर्म ते अभिप्राय गोविंद राधे।
16भक्तिहीन वर्णाश्रम धर्म है बता दे॥ 3999॥
17योग ते अभिप्राय गोविंद राधे।
18भक्तिहीन अष्टांग योग बता दे॥ 4000॥
19ज्ञान ते अभिप्राय गोविंद राधे।
20भक्तिहीन “अहं ब्रह्मास्मि” बता दे॥ 4001॥
21जिस कर्म ते भी हो गोविंद राधे।
22श्रीकृष्ण सेवा वह ग्राह्य बता दे॥ 4002॥
23जिस योग ते भी गोविंद राधे।
24चित्तयोग हरि में हो ग्राह्य बता दे॥ 4003॥