Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 345
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1आनुषंगिक फल गोविंद राधे।
2पंचकोशों को भस्म करा दे॥ 3980॥
3आनुषंगिक फल गोविंद राधे।
4पंच क्लेश अत्यन्ताभाव करा दे॥ 3981॥
5आनुषंगिक फल गोविंद राधे।
6मायिक तनु भी दिव्य बना दे॥ 3982॥
7आनुषंगिक फल गोविंद राधे।
8इन्द्रिय मन बुधि दिव्य बना दे॥ 3983॥
9आनुषंगिक फल गोविंद राधे।
10दिव्य हरिधाम बिनु माँगे दिला दे॥ 3984॥
11सम्बन्ध अभिधेय गोविंद राधे।
12तीसरा प्रयोजन तत्व बता दे॥ 3985॥
13सम्बन्ध अर्थ तो है गोविंद राधे।
14जाते हो नित्य पूर्ण बंधन बता दे॥ 3986॥
15सम्बन्ध ज्ञान यह गोविंद राधे।
16कृष्ण मम स्वामी हौं दास बता दे॥ 3987॥
17अभिधेय ज्ञान यह गोविंद राधे।
18नवधा साधना भक्ति बता दे॥ 3988॥
19साधन भक्ति तो दो गोविंद राधे।
20एक वैधी एक रागानुगा है बता दे॥ 3989॥
21ज्ञान प्रयोजन गोविंद राधे।
22श्रीकृष्ण दिव्य प्रेम प्राप्ति बता दे॥ 3990॥
23प्रेम दो प्रकार का है गोविंद राधे।
24एक महिमा ज्ञान युक्त बता दे॥ 3991॥