Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 343
Reading 354 of 516 · Source nos. 3956–3967 · Source PDF 360
1योगी के योग की गोविंद राधे।
2सीमा तो एकमात्र सिद्धि लौं बता दे॥ 3956॥
3ज्ञानी के ज्ञान की गोविंद राधे।
4सीमा तो है बस मोक्ष लौं बता दे॥ 3957॥
5कर्म, योग, ज्ञान की गोविंद राधे।
6परिसमाप्ति है एक दिन बता दे॥ 3958॥
7भक्तों की भक्ति की गोविंद राधे।
8परिसमाप्ति कभु हो ना बता दे॥ 3959॥
9भक्तों की भक्ति तो गोविंद राधे।
10सदा बाढ़े चंद्रकला ज्यों बता दे॥ 3960॥
11कर्म तो है नश्वर गोविंद राधे।
12स्वर्ग दै के मर जाये सब को बता दे॥ 3961॥
13ज्ञान भी है नश्वर गोविंद राधे।
14मोक्ष दै के मर जाये सब को बता दे॥ 3962॥
15स्वर्ग लोकादि सुख गोविंद राधे।
16कृष्ण सत्ता पै निर्भर बता दे॥ 3963॥
17स्वर्ग लोकादि सुख गोविंद राधे।
18दिव्य सुख की है छाया बता दे॥ 3964॥
19भक्ति है कृपा साध्य गोविंद राधे।
20यज्ञ आदि धर्म साध्य स्वर्ग है बता दे॥ 3965॥
21भक्ति है कृपा साध्य गोविंद राधे।
22ज्ञान साध्य अज्ञान नाश बता दे॥ 3966॥
23भक्ति है कृपा साध्य गोविंद राधे।
24योग साध्य तो आठ सिद्धि हैं बता दे॥ 3967॥