Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 342
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1जिस मन ते हो भक्ति गोविंद राधे।
2उसको करण कारक बतला दे॥ 3944॥
3हरि प्रीत्यर्थ जो भी गोविंद राधे।
4दान दिया जाय सम्प्रदान बता दे॥ 3945॥
5गो दुग्ध आदि जो भी गोविंद राधे।
6हरि को दो सो अपादान बता दे॥ 3946॥
7ब्रह्म श्रीकृष्ण की जो गोविंद राधे।
8भक्ति निष्काम सम्बन्ध बता दे॥ 3947॥
9जिस देश काल में हो गोविंद राधे।
10श्रीकृष्ण भक्ति अधिकरण बता दे॥ 3948॥
11जिसकी हो भक्ति वह गोविंद राधे।
12गोपीजनवल्लभ कृष्ण हैं बता दे॥ 3949॥
13जिसमें हो भक्ति वह गोविंद राधे।
14जीव है श्रीकृष्ण दास बता दे॥ 3950॥
15श्रीकृष्ण भक्ति बिनु गोविंद राधे।
16सब साधन साध्य शून्य बता दे॥ 3951॥
17जितने भी साधन गोविंद राधे।
18सब मर जायें जब साध्य दिला दे॥ 3952॥
19कर्म, योग, ज्ञान में तो गोविंद राधे।
20साधन भिन्न साध्य भिन्न बता दे॥ 3953॥
21किन्तु भक्तियोग में गोविंद राधे।
22साधन साध्य दोनों भक्ति है बता दे॥ 3954॥
23कर्मी के कर्मों की गोविंद राधे।
24सीमा तो है सन्यास लौं बता दे॥ 3955॥