Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 341
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1चुल्लू भर जल भी हो गोविंद राधे।
2प्रेमयुक्त तो हरि दास बना दे॥ 3932॥
3कृष्ण तो हैं पूर्णकाम गोविंद राधे।
4भक्तदत्त सब कछु ले लें बता दे॥ 3933॥
5पत्र पुष्प फल जल गोविंद राधे।
6भक्तिदत्त हरि लें सहर्ष बता दे॥ 3934॥
7भक्तवश्यता का गोविंद राधे।
8यह सब ही है चमत्कार बता दे॥ 3935॥
9कृष्ण नहिं चह कछु गोविंद राधे।
10प्रेमयुक्त सब कछु चाहें बता दे॥ 3936॥
11वस्तु केभूखे नहिं गोविंद राधे।
12भक्ति के भूखे भगवान बता दे॥ 3937॥
13सब ही क्रियाओं ते गोविंद राधे।
14भक्ति का है आदेश बता दे॥ 3938॥
15सब कामनाओं ते गोविंद राधे।
16भक्ति का है आदेश बता दे॥ 3939॥
17समस्त शास्त्रों में गोविंद राधे।
18सर्वत्र भक्ति प्रशंसा बता दे॥ 3940॥
19भक्ति है ऐसा तत्त्व गोविंद राधे।
20जिसमें हैं सातों विभक्ति बता दे॥ 3941॥
21जो बड़भागी जीव गोविंद राधे।
22भक्ति करता है उसे कर्ता बता दे॥ 3942॥
23जो द्रव्य हरि हेतु गोविंद राधे।
24दिये जायें उसे कर्म कारक बता दे॥ 3943॥