Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 340
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1कानों ते करे नित गोविंद राधे।
2हरि नाम गुण लीला श्रवण बता दे॥ 3920॥
3नासिका ते कृष्ण की गोविंद राधे।
4माल्य तुलसी की गंध ले बता दे॥ 3921॥
5त्वचा ते ब्रज रज गोविंद राधे।
6आदि का करे नित स्पर्श बता दे॥ 3922॥
7हाथों ते गुरु सेवा गोविंद राधे।
8पाँवों ते हरि धाम गमन बता दे॥ 3923॥
9रसना ते नित गोविंद राधे।
10कृष्णप्रसादी खाये जूठन बता दे॥ 3924॥
11ऊधो ने कहा माधो गोविंद राधे।
12मैंने प्रसादी माला पहनी बता दे॥ 3925॥
13आपकी प्रसादी गन्ध गोविंद राधे।
14चन्दन लगाया निज भाल पै बता दे॥ 3926॥
15आपके प्रसादी वस्त्र गोविंद राधे।
16निज तनु पै सदा धारूँ बता दे॥ 3927॥
17आप के प्रसादी भूषण गोविंद राधे।
18निज तनु पै नित धारूँ बता दे॥ 3928॥
19आपकी प्रसादी जूठन गोविंद राधे।
20नित ही खावूँ बड़े चाव ते बता दे॥ 3929॥
21उपर्युक्त सेवन ते गोविंद राधे।
22आपकी माया को जीतूँगा बता दे॥ 3930॥
23सब द्रव्यों ते भी गोविंद राधे।
24भक्ति का है आदेश बता दे॥ 3931॥