Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 339
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1सोना भी भक्ति यदि गोविंद राधे।
2सोचे साधना में नींद आये ना बता दे॥ 3908॥
3तनु का सब कर्म गोविंद राधे।
4हरिभक्ति हित एकमात्र करा दे॥ 3909॥
5लौकिक वस्तुओं को गोविंद राधे।
6अपनी न मानो मानो हरि की बता दे॥ 3910॥
7लोक वेद कर्महित गोविंद राधे।
8हरि अर्पित सब चेष्टा करा दे॥ 3911॥
9शबरी की भक्ति देखो गोविंद राधे।
10भोर पथ रामहित झाड़ू लगा दे॥ 3912॥
11भक्त की समस्त चेष्टा गोविंद राधे।
12हरि के प्रसन्नार्थ ही हों बता दे॥ 3913॥
13भक्ति अधिकारी सब गोविंद राधे।
14देशकाल आदि नहिं नियम बता दे॥ 3914॥
15अतल वितल आदि गोविंद राधे।
16निम्न सात लोकों में भक्ति बता दे॥ 3915॥
17भूर्भुवः स्वः आदि गोविंद राधे।
18ऊर्ध्व सात लोकों में भक्ति बता दे॥ 3916॥
19समस्त स्थानों में गोविंद राधे।
20भक्ति का है अधिकार बता दे॥ 3917॥
21सब इन्द्रियों ते भी गोविंद राधे।
22भक्ति का है आदेश बता दे॥ 3918॥
23नैनों ते करे नित गोविंद राधे।
24हरि अरु हरिजन दरस बता दे॥ 3919॥