Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 338
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1हरि गुरु श्रद्धा दृढ़ गोविंद राधे।
2भक्ति उत्तम अधिकारी बता दे॥ 3896॥
3शास्त्र अरु युक्ति में गोविंद राधे।
4निपुण उत्तम अधिकारी बता दे॥ 3897॥
5शास्त्र ज्ञानहीन श्रद्धा गोविंद राधे।
6युक्त मध्यम अधिकारी बता दे॥ 3898॥
7साधारण श्रद्धायुक्त गोविंद राधे।
8भक्ति कनिष्ठ अधिकारी बता दे॥ 3899॥
9जग में हैं भक्त सब गोविंद राधे।
10ऐसा मानना भक्त लक्षण बता दे॥ 3900॥
11बाल्यावस्था ते ही गोविंद राधे।
12कृष्णभक्ति प्रारम्भ कर दे बता दे॥ 3901॥
13कौन जाने युवावस्था गोविंद राधे।
14आवे न आवे तनु क्षणिक बता दे॥ 3902॥
15युवा भी भक्ति करे गोविंद राधे।
16वृद्ध दशा में देह दुःख बढ़ा दे॥ 3903॥
17वृद्ध भी भक्ति करे गोविंद राधे।
18अंत जैसी मति वैसी गति हो बता दे॥ 3904॥
19उनका स्मरण करि गोविंद राधे।
20मरे जो उन्हीं को हो प्राप्त बता दे॥ 3905॥
21भक्ति कहाँ कब करो गोविंद राधे।
22सदा सर्वत्र ही करो समझा दे॥ 3906॥
23खाना भी भक्ति है गोविंद राधे।
24यदि सोचे तनु हरिभक्ति करा दे॥ 3907॥