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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 335

Reading 346 of 516 · Source nos. 3860–3871 · Source PDF 352

1अतएव कृष्णभक्ति गोविंद राधे।

2तेरे हित करणीय ही है बता दे॥ 3860॥

3तू चला जा मधुवन गोविंद राधे।

4यमुनातट ब्रजधाम बता दे॥ 3861॥

5वहीं पै कृष्ण जी की गोविंद राधे।

6रूपध्यानयुक्त करु भक्ति बता दे॥ 3862॥

7नारद ने कृष्ण जी का गोविंद राधे।

8रूपध्यान भी बताया ध्रुव को बता दे॥ 3863॥

9ऊँ नमो भगवते गोविंद राधे।

10वासुदेवाय दिया मंत्र बता दे॥ 3864॥

11पुनि धु्रव मधुवन गोविंद राधे।

12गये कृष्णभक्ति हित ब्रज में बता दे॥ 3865॥

13तीन तीन रात्रि बाद गोविंद राधे।

14खाया कैथ बेर फल धु्रव ने बता दे॥ 3866॥

15इस प्रकार धु्रव ने तो गोविंद राधे।

16एक महीना किया ध्यान बता दे॥ 3867॥

17दूसरे महीने खाया गोविंद राधे।

18छे दिन पै शुष्क पत्र बता दे॥ 3868॥

19तीसरे मास पिया गोविंद राधे।

20नौ नौ दिन में जल ही बता दे॥ 3869॥

21चौथे महीने में गोविंद राधे।

22बारहवें दिन वायु पी बता दे॥ 3870॥

23पाँचवें महीने में गोविंद राधे।

24श्वास लेना भी किया बन्द बता दे॥ 3871॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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