Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 336
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1खम्भे के समान धु्रव गोविंद राधे।
2एक पैर ते रहे खड़े बता दे॥ 3872॥
3उनकी तपस्या ते गोविंद राधे।
4पूरी त्रिलोकी गई काँप बता दे॥ 3873॥
5देव लोकपाल आदि गोविंद राधे।
6गये श्रीकृष्ण के पास बता दे॥ 3874॥
7सबने की प्रार्थना गोविंद राधे।
8जड़ जंगम सब त्रस्त हैं बता दे॥ 3875॥
9हरि ने कहा यह गोविंद राधे।
10धु्रव के तप का प्रभाव बता दे॥ 3876॥
11पुनि श्रीकृष्ण गये गोविंद राधे।
12ध्रुव के पास मधुवन में बता दे॥ 3877॥
13कृष्ण के आते ही गोविंद राधे।
14ध्रुव का ध्यान हुआ भंग बता दे॥ 3878॥
15ध्रुव ने आँख खोली गोविंद राधे।
16देखा समक्ष श्रीकृष्ण को बता दे॥ 3879॥
17ध्रुव थे निरक्षर गोविंद राधे।
18दण्डवत प्रणाम किया कृष्ण को बता दे॥ 3880॥
19निरक्षर होने ते गोविंद राधे।
20अस्तुति भी कर सके ना बता दे॥ 3881॥
21अन्तर्यामी कृष्ण गोविंद राधे।
22छुआ दिया शंख धु्रव गाल में बता दे॥ 3882॥
23फिर क्या था ध्रुव भी गोविंद राधे।
24हो गये सर्व वेदविज्ञ बता दे॥ 3883॥