Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 334
Reading 345 of 516 · Source nos. 3848–3859 · Source PDF 351
1माता की बात सुनि गोविंद राधे।
2निकल पड़े ध्रुव घर ते बता दे॥ 3848॥
3मार्ग में धु्रव को तो गोविंद राधे।
4मिले देवर्षि नारद जी बता दे॥ 3849॥
5नारद मुनि ने तो गोविंद राधे।
6ध्रुव को दिया ज्ञान उलटा बता दे॥ 3850॥
7नारद बोले धु्रव गोविंद राधे।
8तुम अभी पाँच वर्ष के हो बता दे॥ 3851॥
9अभी तुम खेलो खाओ गोविंद राधे।
10कृष्ण भक्ति आदि है कठिन बता दे॥ 3852॥
11मान अपमान सब गोविंद राधे।
12पूर्व जन्म कर्म के फल हैं बता दे॥ 3853॥
13बड़े बड़े योगी ज्ञानी गोविंद राधे।
14कई जन्म करें साधना बता दे॥ 3854॥
15तब भी ना पावें वे गोविंद राधे।
16श्रीकृष्ण की टुक झाँकी बता दे॥ 3855॥
17याते तुम लौट जावो गोविंद राधे।
18बड़े होकर करो भक्ति बता दे॥ 3856॥
19ध्रुव बोले अब मैं तो गोविंद राधे।
20घर लौटूँगा लक्ष्य पाके बता दे॥ 3857॥
21कृपा करो मुझ पै गोविंद राधे।
22करो मार्ग दर्शन मेरा बता दे॥ 3858॥
23नारद बोले वत्स गोविंद राधे।
24तेरा वैराग्य अति दृढ़ है बता दे॥ 3859॥