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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 333

Reading 344 of 516 · Source nos. 3836–3847 · Source PDF 350

1सुरुचि ने कहा ध्रुव गोविंद राधे।

2पहले करो कृष्णभक्ति बता दे॥ 3836॥

3कृष्ण ते वर लै के गोविंद राधे।

4मेरे उदर ते लो जन्म बता दे॥ 3837॥

5तब राज्य सिंहासन गोविंद राधे।

6तुम प्राप्त कर पावोगे बता दे॥ 3838॥

7सुरुचि के वचनोें ने गोविंद राधे।

8ध्रुव को कर दिया घायल बता दे॥ 3839॥

9धु्रव रोते हुए ही गोविंद राधे।

10गये निज माता पास बता दे॥ 3840॥

11माता को सुनाया सब गोविंद राधे।

12सुरुचि के कटु वचन बता दे॥ 3841॥

13माता ने कहा पुत्र गोविंद राधे।

14सुरुचि ने ठीक कहा है बता दे॥ 3842॥

15तू हरि भक्ति द्वारा गोविंद राधे।

16हरि ते माँग वरदान बता दे॥ 3843॥

17किसी पै दुर्भाव गोविंद राधे।

18करना नहीं समीचीन बता दे॥ 3844॥

19तेरे परदादा अरु गोविंद राधे।

20दादा ने की कृष्णभक्ति बता दे॥ 3845॥

21महालक्ष्मी आदि गोविंद राधे।

22श्रीकृष्ण की करें भक्ति बता दे॥ 3846॥

23कृष्णभक्ति ते ही गोविंद राधे।

24पुत्र तू पायेगा राज्य बता दे॥ 3847॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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