Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 330
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1ज्ञान के मार्ग में भी गोविंद राधे।
2शम दम आदि आठ क्लेश बता दे॥ 3800॥
3भक्ति तो सरल अति गोविंद राधे।
4अधिकारी विचार ना क्लेश ना बता दे॥ 3801॥
5चराचर सब जीव गोविंद राधे।
6भक्ति पथ के अधिकारी बता दे॥ 3802॥
7भक्ति में स्वतंत्र सब गोविंद राधे।
8याते हरि का न पक्षपात है बता दे॥ 3803॥
9सब साधनों में सब गोविंद राधे।
10अधिकारी नहिं सब को बता दे॥ 3804॥
11भक्ति के अधिकारी गोविंद राधे।
12पतितों ते ब्रह्मा तक सब हैं बता दे॥ 3805॥
13सदाचारी दुराचारी गोविंद राधे।
14दोनों अधिकारी भक्ति पथ के बता दे॥ 3806॥
15कुसंस्कारवश गोविंद राधे।
16घोर दुराचारी भी जो हो बता दे॥ 3807॥
17किन्तु अनन्य बनि गोविंद राधे।
18करे कृष्णभक्ति सो भक्त बता दे॥ 3808॥
19सुदुराचारी को गोविंद राधे।
20अनन्य भक्ति तो भक्त बना दे॥ 3809॥
21परम अपवित्र भी हो गोविंद राधे।
22भक्ति करे भक्ति पवित्र बना दे॥ 3810॥
23मायाबद्ध मायामुक्त गोविंद राधे।
24दोनों अधिकारी भक्ति पथ के बता दे॥ 3811॥