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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 329

Reading 340 of 516 · Source nos. 3788–3799 · Source PDF 346

1भरत ने मृग तनु गोविंद राधे।

2हरि स्तुति करके छोड़ा बता दे॥ 3788॥

3मृग का शरीर पुनि गोविंद राधे।

4मृत्युकाल हरिस्तुति अचरज बता दे॥ 3789॥

5सर्व धर्म-त्रुटियों के गोविंद राधे।

6शमनार्थ श्रीकृष्ण भक्ति बता दे॥ 3790॥

7जैसे सब प्राणियों का गोविंद राधे।

8जीवन सब जानें सलिल बता दे॥ 3791॥

9ऐसे सब सिद्धियों का गोविंद राधे।

10जीवन एकमात्र भक्ति बता दे॥ 3792॥

11धर्म अर्थ काम मोक्ष गोविंद राधे।

12सब फल श्रीकृष्ण भक्ति दे बता दे॥ 3793॥

13भक्ति है स्वतंत्र अति गोविंद राधे।

14ज्ञान वैराग्य भक्ति अंग ना बता दे॥ 3794॥

15भक्ति ते मिलें तीनों गोविंद राधे।

16ज्ञान वैराग्य अरु भक्ति बता दे॥ 3795॥

17भोगी या योगी हो गोविंद राधे।

18कृष्ण भक्ति बिनु दोनों निंद्य हैं बता दे॥ 3796॥

19भक्ति है सरल अति गोविंद राधे।

20योग यज्ञ जप तप व्रत ना बता दे॥ 3797॥

21धर्मानुष्ठान में तो गोविंद राधे।

22छे नियम पालन क्लेश है बता दे॥ 3798॥

23योग के मार्ग में भी गोविंद राधे।

24यम नियम आदि आठ हैं बता दे॥ 3799॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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