Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 327
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1समर्थ हो के भी गोविंद राधे।
2भक्त हित हों असमर्थ बता दे॥ 3764॥
3काल कर्म गुणातीत गोविंद राधे।
4कृष्ण हैं पूर्ण स्वतन्त्र बता दे॥ 3765॥
5काल कर्म गुणाधीन गोविंद राधे।
6जीव है पूर्ण परतन्त्र बता दे॥ 3766॥
7भक्ति जीव को स्वतन्त्र गोविंद राधे।
8कृष्ण को पूर्ण परतन्त्र बना दे॥ 3767॥
9ब्रह्मा है वेदों का गोविंद राधे।
10आदि वक्ता विज्ञाता बता दे॥ 3768॥
11कृष्ण ने ब्रह्मा को गोविंद राधे।
12वेदों का ज्ञान कराया बता दे॥ 3769॥
13उस ब्रह्मा ने कहा गोविंद राधे।
14वेदों में तो एक भक्ति बता दे॥ 3770॥
15अन्य धर्म कर्म आदि गोविंद राधे।
16सब हैं कृष्ण प्रीत्यर्थ बता दे॥ 3771॥
17दान, व्रत, तप, यज्ञ गोविंद राधे।
18जप आदि फल कृष्णभक्ति बता दे॥ 3772॥
19यदि भक्ति मिली नहीं गोविंद राधे।
20तो जप तप आदि व्यर्थ बता दे॥ 3773॥
21योग, सांख्य, संन्यास गोविंद राधे।
22हरिभक्ति बिनु सब व्यर्थ हैं बता दे॥ 3774॥
23सब साधनों का फल गोविंद राधे।
24एकमात्र श्रीकृष्ण भक्ति बता दे॥ 3775॥