Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 326
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1उपर्युक्त सब बातें गोविंद राधे।
2केवल भक्तिमार्ग में हैं बता दे॥ 3752॥
3मुख्या गौणी वृत्ति ते गोविंद राधे।
4वेद करें हरि निर्वचन बता दे॥ 3753॥
5अन्वय व्यतिरेक ते गोविंद राधे।
6वेद करें हरि निर्वचन बता दे॥ 3754॥
7प्रमाता बल ते हो गोविंद राधे।
8कर्मयोग साधन सिद्ध बता दे॥ 3755॥
9प्रमाण बल ते हो गोविंद राधे।
10ज्ञान साधन की सिद्धि बता दे॥ 3756॥
11प्रमेय बल ते तो गोविंद राधे।
12भक्ति की सिद्धि भगवान करा दे॥ 3757॥
13दूर ते भी दूर है गोविंद राधे।
14जीव ब्रह्म दूरी वाय भक्ति मिटा दे॥ 3758॥
15वेद कहे भक्ति ही गोविंद राधे।
16हरि के समीप ले जाये बता दे॥ 3759॥
17वेद कहे भक्ति ही गोविंद राधे।
18अदृष्ट हरि का भी रूप दिखा दे॥ 3760॥
19वेद कहे भक्ति ही गोविंद राधे।
20भगवान का दिव्य ज्ञान करा दे॥ 3761॥
21वेद कहे भक्ति ही गोविंद राधे।
22स्वाधीन हरि को अधीन बना दे॥ 3762॥
23भगवान तो समर्थ गोविंद राधे।
24अन्यथा करने में भी हैं बता दे॥ 3763॥