Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 325
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1दक्षिण पश्चिम गोविंद राधे।
2उत्तर खोदो धन मिले ना बता दे॥ 3740॥
3पूर्व दिशा में खोदो गोविंद राधे।
4धन का भण्डार मिलेगा बता दे॥ 3741॥
5कर्म, ज्ञान, योग ते तो गोविंद राधे।
6हरि सेवा लक्ष्य मिले नाहिं बता दे॥ 3742॥
7केवल भक्ति ही ते गोविंद राधे।
8हरि सेवा लक्ष्य प्राप्त होगा बता दे॥ 3743॥
9अभिधीयतेऽनेन गोविंद राधे।
10इति शब्द है अभिधेय बता दे॥ 3744॥
11भाव यह जाते गोविंद राधे।
12साधना ज्ञान हो जाये बता दे॥ 3745॥
13साधन विज्ञान हित गोविंद राधे।
14पाँच हैं उपाय निम्र भक्त को बता दे॥ 3746॥
15प्रथम है उपाय अन्वय गोविंद राधे।
16उस मार्ग ते लक्ष्य प्राप्त हो बता दे॥ 3747॥
17दूसरा व्यतिरेक गोविंद राधे।
18उस मार्ग बिनु लक्ष्य मिले ना बता दे॥ 3748॥
19तीसरा है वह मार्ग गोविंद राधे।
20अन्य की अपेक्षा करे ना बता दे॥ 3749॥
21चौथा उस मार्ग में गोविंद राधे।
22सार्वत्रकिता भी हो बता दे॥ 3750॥
23पंचम उस मार्ग में गोविंद राधे।
24सदातनत्व भी हो यह बता दे॥ 3751॥