Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 324
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1सेव्य की इच्छा में गोविंद राधे।
2इच्छा रखना ही सेवा बता दे॥ 3728॥
3कामना आते ही गोविंद राधे।
4हरि सेवा भावना समाप्त हो बता दे॥ 3729॥
5प्रेमी की प्रति चेष्टा गोविंद राधे।
6प्रिय की सेवा के लिए हो बता दे॥ 3730॥
7प्राण जब जाये हरि गोविंद राधे।
8तनु पंच महाभूत सेवा में लगा दे॥ 3731॥
9जल मिले सोई जल गोविंद राधे।
10जेहि जल हरि अस्नान करा दे॥ 3732॥
11तेज मिले दर्पण गोविंद राधे।
12सोइ जामें हरि मुख देखें बता दे॥ 3733॥
13व्योम मिले सेवा कुंज गोविंद राधे।
14जहँ श्यामा श्याम सँग रास रचा दे॥ 3734॥
15भूमि मिले सोई पथ गोविंद राधे।
16जेहि पथ चलें श्यामा श्याम बता दे॥ 3735॥
17पवन व्यजन मिले गोविंद राधे।
18सोइ, सखि जासों श्यामा श्याम को हवा दे॥ 3736॥
19श्रीकृष्ण सेवा लक्ष्य गोविंद राधे।
20जानने ते ही लक्ष्य मिले ना बता दे॥ 3737॥
21तदर्थ गुरु द्वारा गोविंद राधे।
22निर्दिष्ट कृष्णभक्ति मन ते करा दे॥ 3738॥
23घर में गड़ा है धन गोविंद राधे।
24गुरु जहाँ जैसे कहे खोदो बता दे॥ 3739॥