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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 321

Reading 332 of 516 · Source nos. 3692–3703 · Source PDF 338

1ज्ञानी अरु योगी ते गोविंद राधे।

2श्रेष्ठ है भक्त सद्ग्रन्थ बता दे॥ 3692॥

3गीता में कृष्ण कहें गोविंद राधे।

4तपस्वी ते श्रेष्ठ ज्ञानी बता दे॥ 3693॥

5ज्ञानी अरु कर्मी ते गोविंद राधे।

6श्रेष्ठ है सच्चा योगी बता दे॥ 3694॥

7योगियों ते भी है गोविंद राधे।

8सर्वश्रेष्ठ श्रीकृष्णभक्त बता दे॥ 3695॥

9कर्मी भुक्ति कामी है गोविंद राधे।

10ज्ञानी भी है मुक्ति कामी बता दे॥ 3696॥

11योगी सिद्धि कामी है गोविंद राधे।

12भक्त ही एक निष्काम बता दे॥ 3697॥

13याते भक्त नित्य शान्त गोविंद राधे।

14और सब नित्य अशान्त बता दे॥ 3698॥

15भक्त चाहे कृष्णसुख गोविंद राधे।

16कर्मी आदि चाहें आत्म सुख को बता दे॥ 3699॥

17कर्मी ज्ञानी योगी आदि गोविंद राधे।

18चाहते हैं बस आत्महित ही बता दे॥ 3700॥

19सच्चा कृष्णभक्त तो गोविंद राधे।

20चाहे एकमात्र कृष्ण हित ही बता दे॥ 3701॥

21भव रोग वैद्य तो गोविंद राधे।

22वेद शास्त्र अरु सद्गुरु हैं बता दे॥ 3702॥

23भवरोग कारण गोविंद राधे।

24भगवद् बहिर्मुखता है बता दे॥ 3703॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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