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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 315

Reading 326 of 516 · Source nos. 3631–3642 · Source PDF 332

1अपूर्व फल अर्थ गोविंद राधे।

2वाते उत्कृष्ट फल हो ना बता दे॥ 3631॥

3व्यास ने समाधि में गोविंद राधे।

4भक्ति का अनुभव किया था बता दे॥ 3632॥

5अतएव भागवत गोविंद राधे।

6अपूर्व फल संयुक्त बता दे॥ 3633॥

7अर्थवाद का अर्थ गोविंद राधे।

8भक्ति की अति ही प्रशंसा बता दे॥ 3634॥

9भागवत में तो गोविंद राधे।

10बार बार भक्ति गुणगान है बता दे॥ 3635॥

11उपपत्ति अर्थ यह गोविंद राधे।

12युक्तियों ते भी विषय सिद्ध हो बता दे॥ 3636॥

13श्री भागवत में भी गोविंद राधे।

14युक्ति ते भी भक्ति सिद्ध है बता दे॥ 3637॥

15एक बार नारद गोविंद राधे।

16ब्रह्मा की की भक्ति बता दे॥ 3638॥

17ब्रह्मा प्रसन्न हुये गोविंद राधे।

18नारद ते उस समय बता दे॥ 3639॥

19ब्रह्मा ने मुनि को गोविंद राधे।

20श्री भागवत था सुनाया बता दे॥ 3640॥

21पुनि वह भागवत गोविंद राधे।

22व्यास को सुनाया मुनि ने बता दे॥ 3641॥

23समस्त प्रश्नों का गोविंद राधे।

24उत्तर भागवत में है बता दे॥ 3642॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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