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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 314

Reading 325 of 516 · Source nos. 3619–3630 · Source PDF 331

1तब कहा नारद ने गोविंद राधे।

2भक्ति प्रमुख भागवत बना दे॥ 3619॥

3किसी भी विषय का गोविंद राधे।

4निर्णय हो छे प्रकार ते बता दे॥ 3620॥

5प्रथम उपक्रम गोविंद राधे।

6दूसरा उपसंहार बता दे॥ 3621॥

7तीसरा अभ्यास गोविंद राधे।

8चौथा अपूर्वफल शास्त्र बता दे॥ 3622॥

9पाँचवा अर्थवाद गोविंद राधे।

10छठा तो है उपपत्ति बता दे॥ 3623॥

11उपर्युक्त छे लक्षण गोविंद राधे।

12युक्त है श्री भागवत बता दे॥ 3624॥

13“जन्माद्यस्य यतः” गोविंद राधे।

14उपक्रम है प्रथम श्लोक बता दे॥ 3625॥

15प्रथम श्लोक में ही गोविंद राधे।

16कृष्ण का ध्यान बताया बता दे॥ 3626॥

17उपसंहार में भी गोविंद राधे।

18कृष्ण का ध्यान ही बताया बता दे॥ 3627॥

19एक ही विषय का गोविंद राधे।

20बार बार कथन अभ्यास बता दे॥ 3628॥

21भागवत ग्रन्थ में गोविंद राधे।

22बार बार भक्ति का निरूपण बता दे॥ 3629॥

23अपूर्व फल अर्थ गोविंद राधे।

24वैसा फल अन्य कोई ना बता दे॥ 3630॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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