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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 313

Reading 324 of 516 · Source nos. 3607–3618 · Source PDF 330

1श्रीमद् भागवत गोविंद राधे।

2शब्दब्रह्म वेदवृक्ष फल है बता दे॥ 3607॥

3यह वेदवृक्ष फल गोविंद राधे।

4पक कर आपु ही गिरा है बता दे॥ 3608॥

5इस फल में तो शुक गोविंद राधे।

6चोंच मारि और भी सरस बना दे॥ 3609॥

7जग में सभी फल गोविंद राधे।

8पिये नहिं जायें खाये जायें बता दे॥ 3610॥

9भागवत फल रस गोविंद राधे।

10छिलका या गुठली नहीं है बता दे॥ 3611॥

11कब तक पान करे गोविंद राधे।

12भागवत रस का यह भी बता दे॥ 3612॥

13मुक्ति पश्चात् भी गोविंद राधे।

14तैलधारावत् पीना है बता दे॥ 3613॥

15व्यास ने प्रथम किया गोविंद राधे।

16तीन वेदों का चार भाग बता दे॥ 3614॥

17वेद उत्तर काण्ड गोविंद राधे।

18नाम है वेदान्त दर्शन बता दे॥ 3615॥

19व्यास ने व्यक्त किया गोविंद राधे।

20उसी को ब्रह्मसूत्र ग्रंथ में बता दे॥ 3616॥

21ब्रह्मसूत्र अर्थ गूढ़ गोविंद राधे।

22याते इतिहास पुराण बना दे॥ 3617॥

23फिर भी मिली न शान्ति गोविंद राधे।

24मन रहा व्यास का अशान्त बता दे॥ 3618॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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