लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 312

Reading 323 of 516 · Source nos. 3595–3606 · Source PDF 329

1पुनि महाभारत गोविंद राधे।

2पश्चात् सत्रह पुराण बता दे॥ 3595॥

3अंत में व्यास ने गोविंद राधे।

4भागवत ग्रन्थ लिखा था बता दे॥ 3596॥

5भागवत पुराण तो है गोविंद राधे।

6धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष रहित बता दे॥ 3597॥

7“प्रोज्झित कैतव” गोविंद राधे।

8श्रीधर कह मुक्तिरहित बता दे॥ 3598॥

9भागवत में तो है गोविंद राधे।

10पंचम पुरुषार्थ प्रेम तत्व ही बता दे॥ 3599॥

11“आर्तो जिज्ञासु” श्लोक गोविंद राधे।

12निहित “च” शब्द गोपी प्रेम बता दे॥ 3600॥

13गीता में कर्म भक्ति गोविंद राधे।

14भागवत केवल भक्ति बता दे॥ 3601॥

15गीता ते मुक्ति मिले गोविंद राधे।

16भागवत मुक्त को ब्रज रस पिला दे॥ 3602॥

17महाभारत में तो गोविंद राधे।

18सकाम कर्मों का निरूपण बता दे॥ 3603॥

19महाभारत युद्घ गोविंद राधे।

20मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को बता दे॥ 3604॥

21गीता उपदेश भी गोविंद राधे।

22मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को बता दे॥ 3605॥

23भगवद् गीता तो गोविंद राधे।

24उपनिषत् गो का है दूध बता दे॥ 3606॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

Source edition and PDF · Text version