Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 308
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1यह सुनि जाबालि गोविंद राधे।
2बने ब्रह्मविद्या शिष्य बता दे॥ 3547॥
3प्रत्यक्ष अनुमान गोविंद राधे।
4दोनों प्रमाण गति जग में बता दे॥ 3548॥
5ईश्वरीय क्षेत्र में तो गोविंद राधे।
6शब्द प्रमाण ही प्रमाण है बता दे॥ 3549॥
7शब्द प्रमाण अर्थ गोविंद राधे।
8नित्य अनादि वेदवाक्य है बता दे॥ 3550॥
9त्रिविध हैं ग्रन्थ सब गोविंद राधे।
10कृत, स्मृत तीसरा विनिर्गत बता दे॥ 3551॥
11मायिक मतिकृत गोविंद राधे।
12ग्रन्थ हैं अमान्य कृत ग्रन्थ बता दे॥ 3552॥
13आप्त प्रणीत ग्रन्थ गोविंद राधे।
14निज शब्दयुक्त स्मृत ग्रन्थ बता दे॥ 3553॥
15ग्रन्थ विनिर्गत गोविंद राधे।
16वेद, शब्द नित्य एक सा ही बता दे॥ 3554॥
17स्वतः प्रामाण्य वेद गोविंद राधे।
18अन्य शास्त्र वेद मूलक हैं बता दे॥ 3555॥
19पौरु षेय भी है वेद गोविंद राधे।
20अपौरु षेय भी है वेद सबको बता दे॥ 3556॥
21वेद अपौरु षेय गोविंद राधे।
22याते पुं दोष ते रहित बता दे॥ 3557॥
23भगवन्निःश्वास तो गोविंद राधे।
24नित्य अनादि वेद प्रकट करा दे॥ 3558॥