Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 307
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1ज्ञानी की बिसात क्या है गोविंद राधे।
2ब्रह्मविद्या भी चाहे प्रेम बता दे॥ 3535॥
3ब्रह्मविद्या ते ही गोविंद राधे।
4ज्ञानियों को हो ब्रह्मज्ञान बता दे॥ 3536॥
5ब्रह्मविद्या तप करे गोविंद राधे।
6श्यामा श्याम प्रेम हित ज्ञानी को बता दे॥ 3537॥
7ब्रह्मविद्या कह गोविंद राधे।
8कृष्णप्रेम बिनु हम शून्य बता दे॥ 3538॥
9एक थे जाबालि गोविंद राधे।
10जीवन्मुक्त ब्रह्मलीन बता दे॥ 3539॥
11एक बार वन में वे गोविंद राधे।
12गये तहँ देखा एक बावड़ी बता दे॥ 3540॥
13बावड़ी निकट एक गोविंद राधे।
14बैठी थी तेज युक्त युवती बता दे॥ 3541॥
15पूछा जाबालि ने गोविंद राधे।
16कौन तुम तप क्यों करती बता दे॥ 3542॥
17युवती ने कहा मैं हूँ गोविंद राधे।
18ब्रह्मविद्या जानें ज्ञानी बता दे॥ 3543॥
19यद्यपि ज्ञानियों को गोविंद राधे।
20मैं ब्रह्म-ज्ञानानंद देउँ बता दे॥ 3544॥
21किन्तु कृष्णप्रेमहीन गोविंद राधे।
22मेरा आनन्द है शून्य बता दे॥ 3545॥
23उसी कृष्णप्रेम हित गोविंद राधे।
24जाबालि हौं तप करौं हौं बता दे॥ 3546॥