Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 306
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1कोइ कर्म धर्म द्वारा गोविंद राधे।
2चाहता है स्वर्ग का सुख ही बता दे॥ 3523॥
3कोइ ज्ञान योग द्वारा गोविंद राधे।
4चाहता है सायुज्य मोक्ष बता दे॥ 3524॥
5हम श्रीकृष्ण पाद गोविंद राधे।
6पंकज की चहँ भक्ति बता दे॥ 3525॥
7हमें लोक परलोक गोविंद राधे।
8अपवर्ग ते क्या है काम बता दे॥ 3526॥
9शंकराचार्य कह गोविंद राधे।
10विधि हरि हर पर कृष्ण हैं बता दे॥ 3527॥
11शंकर कहें कृष्ण गोविंद राधे।
12विधि हरि हर के भी स्वामी बता दे॥ 3528॥
13गोपी प्रेम सार हैं या गोविंद राधे।
14श्रुतियों का गुप्त धन कृष्ण हैं बता दे॥ 3529॥
15जिसने भी कृष्ण को गोविंद राधे।
16देखा नहिं सो है आत्मघाती बता दे॥ 3530॥
17शंकर ने हरि की ही गोविंद राधे।
18मूर्ति की स्थापना की थी बता दे॥ 3531॥
19मधुसूदन कह गोविंद राधे।
20मेरे आराध्य तत्व कृष्ण हैं बता दे॥ 3532॥
21मधुसूदन कह गोविंद राधे।
22ज्ञानी का स्वभाव कृष्णभक्ति है बता दे॥ 3533॥
23भूत ब्रह्मज्ञानियों ने गोविंद राधे।
24श्री कृष्ण भक्ति की है ज्ञानी को बता दे॥ 3534॥