Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 304
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1कृष्ण महिमा का गोविंद राधे।
2विशद निरूपण किया ना बता दे॥ 3499॥
3भागवत धर्मों का गोविंद राधे।
4विशद निरूपण किया ना बता दे॥ 3500॥
5परमहंसों को गोविंद राधे।
6वही प्रिय कथा श्रीकृष्ण की बता दे॥ 3501॥
7जिस भी वाणी में गोविंद राधे।
8कृष्णलीलाकथा ना हो व्यर्थ बता दे॥ 3502॥
9जिस वाणी ते भी गोविंद राधे।
10श्रीकृष्ण गुणगान हो ना बता दे॥ 3503॥
11वह वाणी तो है गोविंद राधे।
12अपवित्र अति निंदनीय बता दे॥ 3504॥
13शब्दब्रह्म वेदवाणी गोविंद राधे।
14कृष्ण लीला बिनु व्यर्थ है बता दे॥ 3505॥
15श्रीकृष्ण गुणहीन गोविंद राधे।
16वेद वाणी भी बंध्या वाणी है बता दे॥ 3506॥
17श्रीकृष्णभक्त तो गोविंद राधे।
18उस वाणी ते रहे दूर बता दे॥ 3507॥
19जिसका प्रत्येक श्लोक गोविंद राधे।
20कृष्ण गुणगान ते युक्त हो बता दे॥ 3508॥
21वह दिव्य वाणी तो गोविंद राधे।
22समस्त पापों को ही नसा दे॥ 3509॥
23विशुद्घ ज्ञान भी गोविंद राधे।
24भक्तिरहित है व्यर्थ बता दे॥ 3510॥