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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 303

Reading 314 of 516 · Source nos. 3487–3498 · Source PDF 320

1व्यास खिन्न बैठे थे गोविंद राधे।

2तभी आये मुनि नारद बता दे॥ 3487॥

3नारद आये लखि गोविंद राधे।

4व्यास हो गये खरे तुरत बता दे॥ 3488॥

5पुनि किया व्यास जी ने गोविंद राधे।

6नारद मुनि की पूजा बता दे॥ 3489॥

7नारद बोले व्यास गोविंद राधे।

8आपने रचा महाभारत बता दे॥ 3490॥

9पुनि अकृतार्थ सम गोविंद राधे।

10खिन्न शोकयुक्त क्यों दीखें बता दे॥ 3491॥

11व्यास बोले मुनि गोविंद राधे।

12आपने कहा ठीक ही है बता दे॥ 3492॥

13मेरा हृदय अभी गोविंद राधे।

14रचना ते तुष्ट नहीं है बता दे॥ 3493॥

15आप हैं ब्रह्मा के गोविंद राधे।

16मानसपुत्र महर्षि बता दे॥ 3494॥

17बता दें आप ही गोविंद राधे।

18क्यों है असन्तोष मोको बता दे॥ 3495॥

19नारद बोले व्यास गोविंद राधे।

20आपने कृष्णकथा लिखी ना बता दे॥ 3496॥

21जाते कृष्ण तुष्ट ना हों गोविंद राधे।

22वह शास्त्रज्ञान है अधूरा बता दे॥ 3497॥

23धर्म अर्थ काम का गोविंद राधे।

24आपने निरूपण किया है बता दे॥ 3498॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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