Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 301
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1जीवनमुक्त ज्ञानी गोविंद राधे।
2भक्ति सुख में ब्रह्म सुख को डुबा दे॥ 3463॥
3ज्ञानी परमहंस गोविंद राधे।
4ब्रह्मध्यान तजि दृग आँसू बहा दे॥ 3464॥
5शौनक बोले सूत गोविंद राधे।
6आप हैं वक्ता महान बता दे॥ 3465॥
7शुक ने सुनाई जो गोविंद राधे।
8कृष्ण कथा सोई मोहिं सुना दे॥ 3466॥
9वह श्रीकृष्ण कथा गोविंद राधे।
10किस युग में कहाँ हुई थी बता दे॥ 3467॥
11वह श्रीकृष्ण कथा गोविंद राधे।
12किस कारण ते हुई थी बता दे॥ 3468॥
13किसकी प्रेरणा ते गोविंद राधे।
14परमहंस संहिता बनाई बता दे॥ 3469॥
15क्यों यह भागवत गोविंद राधे।
16संहिता सुनाई गई सूत बता दे॥ 3470॥
17नागरिकों ने गोविंद राधे।
18कैसे पहिचाना शुक को बता दे॥ 3471॥
19पागल गूँगे जड़ गोविंद राधे।
20बन कर विचरे शुक थे बता दे॥ 3472॥
21शुक तो गृहस्थी घर गोविंद राधे।
22गो दोहन काल रुकें थे बता दे॥ 3473॥
23सूत जी बोले सुनु गोविंद राधे।
24तीसरे युग द्वापर में बता दे॥ 3474॥