Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 300
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1भागवत अंत कह गोविंद राधे।
2“भक्त्या विमुच्येन्नरः” बता दे॥ 3451॥
3याको अर्थ भागवत गोविंद राधे।
4पढ़ि सुनि करे भक्ति मुक्ति दिला दे॥ 3452॥
5गर्भ में थे शुक मुक्त गोविंद राधे।
6गर्भ में परीक्षित मुक्त थे बता दे॥ 3453॥
7गर्भ में परीक्षित ने गोविंद राधे।
8कृष्ण का दिव्यरूप देखा बता दे॥ 3454॥
9गर्भ ते बाहर आके गोविंद राधे।
10इधर उधर देखें कृष्ण कहाँ हैं बता दे॥ 3455॥
11“सर्वभूत हृदय” अर्थ गोविंद राधे।
12शुकदेव अन्तर्यामी बता दे॥ 3456॥
13“सर्वभूत हृदय” अर्थ गोविंद राधे।
14शुक जीवों के नियामक बता दे॥ 3457॥
15परीक्षित सौभाग्य गोविंद राधे।
16शुक ने सुनाया भागवत बता दे॥ 3458॥
17हरि गुण मुग्ध शुक गोविंद राधे।
18भागवत पढ़ा औ सुनाया बता दे॥ 3459॥
19“हरते इति हरिः” भाव गोविंद राधे।
20ब्रह्मलीन का भी मन हर ले बता दे॥ 3460॥
21याही ते शुक कहें गोविंद राधे।
22सर्व वेदान्त सार भागवत बता दे॥ 3461॥
23भक्ति सुख लवलेश गोविंद राधे।
24पै कोटि कोटि ब्रह्मानन्द लुटा दे॥ 3462॥