Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 299
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1शुक सोचें ऐसे श्याम गोविंद राधे।
2मोहिं अपनायेंगे कैसे बता दे॥ 3439॥
3व्यास ने समाधि द्वारा गोविंद राधे।
4देखा शुकदेव हैं निराश बता दे॥ 3440॥
5व्यास निज शिष्यों ते गोविंद राधे।
6“अहो बकीयं” श्लोक पुनः सुनवा दे॥ 3441॥
7“अहो बकीयं” अर्थ गोविंद राधे।
8पूतना को हरि हरिधाम दिला दे॥ 3442॥
9पूतना ने श्याम को गोविंद राधे।
10मृत्युप्रद विष था पिलाया बता दे॥ 3443॥
11यह श्लोक सुनि शुक गोविंद राधे।
12साहस करि आये व्यास ढिग बता दे॥ 3444॥
13व्यास ते सुना पुनि गोविंद राधे।
14शुक ने भागवत पुराण बता दे॥ 3445॥
15शुक ने परीक्षित को गोविंद राधे।
16भागवत सुना केमाया मुक्त करा दे॥ 3446॥
17शुक सा वक्ता हो गोविंद राधे।
18परीक्षित सा हो श्रोता हरि ते मिला दे॥ 3447॥
19भागवत सुनि करे गोविंद राधे।
20कृष्ण भक्ति तो कृष्ण साध्य दिला दे॥ 3448॥
21श्रीकृष्ण भक्ति ते गोविंद राधे।
22जीव का लक्ष्य पूर्ण होगा बता दे॥ 3449॥
23श्रीकृष्ण भक्ति मुख्य गोविंद राधे।
24श्रवण स्मरण कीर्तन हैं बता दे॥ 3450॥