Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 295
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1तुम भी ब्रह्म हम भी ब्रह्म गोविंद राधे।
2ब्रह्म ब्रह्म को ब्रह्मज्ञान भला का दे॥ 3391॥
3ऊधो अधकचरे ज्ञानी गोविंद राधे।
4आओ मो ढिग पूर्ण ज्ञानी बना दे॥ 3392॥
5ज्ञानी सब ब्रह्म देखे गोविंद राधे।
6तुम मोहिं अज्ञ कैसे देखो बता दे॥ 3393॥
7जितना हो ब्रह्मज्ञान गोविंद राधे।
8उतना हो ब्रह्म प्रेम ऊधो ज्ञान का दे॥ 3394॥
9ज्ञान देने आये ऊधो गोविंद राधे।
10प्रेम ले ले ब्रह्मज्ञान दान करा दे॥ 3395॥
11जासों तुम ज्ञानी बने गोविंद राधे।
12दासी हैं ऋचाएँ मेरी मोहिं ज्ञान का दे॥ 3396॥
13तेरा ब्रह्म ऊधो मेरे गोविंद राधे।
14पाछे पाछे डोले ब्रह्मज्ञान मोहिं का दे॥ 3397॥
15भक्ति बिनु ज्ञान ऊधो गोविंद राधे।
16लख चौरासी द्वार घुमा दे॥ 3398॥
17भक्ति तो बिनु माँगे गोविंद राधे।
18ऊधो ब्रह्मज्ञान अरु मुक्ति दिला दे॥ 3399॥
19ज्ञान ते मिले जो मुक्ति गोविंद राधे।
20दासी पद माँगे दास पैरों ठुकरा दे॥ 3400॥
21भक्तिदास ब्रह्म ब्रह्म गोविंद राधे।
22दासी मुक्ति मुक्ति दास ज्ञान बता दे॥ 3401॥
23ऊधो ज्ञान अज्ञान गोविंद राधे।
24ले ले प्रेमदान ज्ञान यमुना बहा दे॥ 3402॥