Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 294
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1मोको ब्रज कन कन में गोविंद राधे।
2छन छन घनश्याम दीखें बता दे॥ 3379॥
3जब हो वियोग ऊधो गोविंद राधे।
4तब योग की बात सोचे बता दे॥ 3380॥
5मेरा तो श्याम ते ही गोविंद राधे।
6नित्य संयोग है रहेगा बता दे॥ 3381॥
7योग जोग हम नाहीं गोविंद राधे।
8ऊधो भोगी माधव को योग सिखा दे॥ 3382॥
9कुबरी के यार माधो गोविंद राधे।
10उनको ही ऊधो ब्रह्मज्ञान सिखा दे॥ 3383॥
11ब्रह्म बन जाऊँ मैं जो गोविंद राधे।
12मेरे पति सुत कहाँ जायेंगे बता दे॥ 3384॥
13ऊधो तुम कैसे ज्ञानी गोविंद राधे।
14ज्ञान अधिकारी हम कैसे बता दे॥ 3385॥
15ज्ञान संन्यासियों का गोविंद राधे।
16हम तो गृहस्थी गोपी हमें ज्ञान का दे॥ 3386॥
17ज्ञान तो विरक्तों का है गोविंद राधे।
18मेरा मन श्यामासक्त ब्रह्मज्ञान का दे॥ 3387॥
19ज्ञान अधिकारी को गोविंद राधे।
20हम तो गमारी गोपी हमें ज्ञान का दे॥ 3388॥
21मन माधव ढिग गोविंद राधे।
22ऊधो ब्रह्म ध्यान किस मन ते करा दे॥ 3389॥
23मन ना अनेक ऊधो गोविंद राधे।
24एक मन हरि ढिग दूजो और ला दे॥ 3390॥