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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 293

Reading 304 of 516 · Source nos. 3367–3378 · Source PDF 310

1ज्ञानी सनकादि लखि गोविंद राधे।

2अपनी समाधि उपाधि भुला दे॥ 3367॥

3ज्ञानी सनकादि माँगें गोविंद राधे।

4वास नरक किन्तु प्रेम दिला दे॥ 3368॥

5ब्रह्मज्ञानी जो भी देखे गोविंद राधे।

6ज्ञान भूले मन प्रेमसिन्धु में डुबा दे॥ 3369॥

7ऊधो गये ब्रज में गोविंद राधे।

8गोपियों को ब्रह्मज्ञान देने बता दे॥ 3370॥

9कहा एक गोपी ते गोविंद राधे।

10कृष्ण बिनु तुमको है दुःख बता दे॥ 3371॥

11दुःखनिवृत्ति हेतु गोविंद राधे।

12करु कछु दिन ब्रह्म चिन्तन बता दे॥ 3372॥

13गोपी कह ऊधो जी गोविंद राधे।

14उर नाहिं ठौर भरे श्याम हैं बता दे॥ 3373॥

15पुनि एक गोपी ते गोविंद राधे।

16ऊधो ने कहा तुम दुखी हो बता दे॥ 3374॥

17याको उपाय यह गोविंद राधे।

18करु ब्रह्मज्ञान मन धारणा बता दे॥ 3375॥

19गोपी ने कहा ऊधो गोविंद राधे।

20मेरा मन श्याम के है पास बता दे॥ 3376॥

21पुनि एक गोपी ते गोविंद राधे।

22ऊधो कह तोहिं दुख विरह का बता दे॥ 3377॥

23गोपी ने कहा ऊधो गोविंद राधे।

24तुमको है बुद्धि विपर्यय बता दे॥ 3378॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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