Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 291
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1प्रेमानन्द पाया जो भी गोविंद राधे।
2ब्रह्मलीन ब्रह्मानंद भुला दे॥ 3343॥
3इक्षु वृक्ष ही है मधुर गोविंद राधे।
4उसमें हो फल तो मधुरतम बता दे॥ 3344॥
5ऐसे निराकार ब्रह्म गोविंद राधे।
6मधुर है किन्तु कृष्ण मधुरतम बता दे॥ 3345॥
7चंदन तरु सुगंध गोविंद राधे।
8फूल होता तो सुगंध कितनी बता दे॥ 3346॥
9ऐसे ही ब्रह्म ते भी गोविंद राधे।
10कृष्ण में रस है विलक्षण बता दे॥ 3347॥
11ज्ञानानंद गन्ना ज्योँ गोविंद राधे।
12प्रेमानंद मिश्री ज्यों भेद यों जना दे॥ 3348॥
13ब्रह्मानंद आम वृक्ष गोविंद राधे।
14प्रेम आम फल भेद इतना बता दे॥ 3349॥
15कोटि कोटि ब्रह्मानन्द गोविंद राधे।
16गोविन्दानँद पै तू लुटा दे॥ 3350॥
17ब्रह्मानंद प्रेमानंद गोविंद राधे।
18दोनों एक भेद माधुर्य का बता दे॥ 3351॥
19ज्ञानानन्द प्रेमानन्द गोविंद राधे।
20एक ब्रह्म के ही दो रूप बता दे॥ 3352॥
21गर्भस्थ शिशु सुख गोविंद राधे।
22शिशु लीला सुख जैसा भेद बता दे॥ 3353॥
23गर्भ शिशु सुख ब्रह्म गोविंद राधे।
24शिशु सुख प्रेमानंद कृष्ण का बता दे॥ 3354॥