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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 289

Reading 300 of 516 · Source nos. 3319–3330 · Source PDF 306

1जो ब्रह्म बड़ा रहे गोविंद राधे।

2सो ब्रह्म किसी के न काम का बता दे॥ 3319॥

3जो ब्रह्म बड़ा करे गोविंद राधे।

4सो ब्रह्म भगवान प्रेमसुधा दे॥ 3320॥

5ऐश्वर्य धर्म यश गोविंद राधे।

6श्री ज्ञान वैराग्य भग हैं बता दे॥ 3321॥

7ऐश्वर्य आदि छे हों गोविंद राधे।

8जिसमें अनन्त भगवान बता दे॥ 3322॥

9ऐश्वर्य आदि छे गोविंद राधे।

10गुण जीवों में हों अल्प बता दे॥ 3323॥

11भगवान का भग गोविंद राधे।

12नित्य भी निरतिशय भी है बता दे॥ 3324॥

13कृष्ण में है ऐश्वर्य गोविंद राधे।

14स्वेतर सकल स्वामित्व बता दे॥ 3325॥

15कृष्ण में है माधुर्य गोविंद राधे।

16सब ही अवस्था में मधुर बता दे॥ 3326॥

17कृष्ण में है तेज भी गोविंद राधे।

18काल माया आदि पै शासन बता दे॥ 3327॥

19कृष्ण में अनन्त ज्ञान गोविंद राधे।

20याते सर्वज्ञ सर्ववित् हैं बता दे॥ 3328॥

21भक्तवत्सलता गोविंद राधे।

22कृपालुता गुण कृष्ण में बता दे॥ 3329॥

23भक्तवश्यता गोविंद राधे।

24कृतज्ञता गुण कृष्ण में बता दे॥ 3330॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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