Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 288
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1ब्रह्म को भी प्रणाम गोविंद राधे।
2परमात्मा को प्रणाम बता दे॥ 3307॥
3ब्रह्म का है भक्त ज्ञानी गोविंद राधे।
4परमात्मा भक्त योगी बता दे॥ 3308॥
5कृष्ण भगवान का गोविंद राधे।
6भक्त कहलाये भक्त बता दे॥ 3309॥
7एक रूप निष्क्रिय गोविंद राधे।
8दूजो न्याय कर्ता तीजो भक्तों को कृपा दे॥ 3310॥
9ब्रह्म तो अकर्ता रहे गोविंद राधे।
10परमात्मा न्यायी भगवान कृपा दे॥ 3311॥
11ब्रह्म के स्वरूप तीन गोविंद राधे।
12किन्तु मेरे काम का भगवान बता दे॥ 3312॥
13सबते है छोटी पृथिवी गोविंद राधे।
14सबते बड़ा आकाश बता दे॥ 3313॥
15आकाश ते भी बड़ा गोविंद राधे।
16पूर्णतम ब्रह्म है अनन्त बता दे॥ 3314॥
17ब्रह्म ते बड़ा कोई गोविंद राधे।
18था न तो है न तो होगा बता दे॥ 3315॥
19जिसके समान ना हो गोविंद राधे।
20बड़ा भी न हो कोई ब्रह्म बता दे॥ 3316॥
21“सत्यं ज्ञानमनंतं” गोविंद राधे।
22याते ब्रह्म बड़ा है अनन्त बता दे॥ 3317॥
23ब्रह्म अर्थ सबते बड़ा गोविंद राधे।
24दूजो अर्थ आपु जैसा बड़ा भी बना दे॥ 3318॥