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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 287

Reading 298 of 516 · Source nos. 3295–3306 · Source PDF 304

1हरि के चरित्र सुनि गोविंद राधे।

2मुमुक्षु को मिले मुक्ति बता दे॥ 3295॥

3दो हैं मुमुक्षु जन गोविंद राधे।

4एक मन शुद्धि हेतु भक्ति करा दे॥ 3296॥

5दूसरा मुमुक्षु है गोविंद राधे।

6शुद्ध मन ते लक्ष्य प्राप्त करा दे॥ 3297॥

7हरि के चरित्र सुनि गोविंद राधे।

8विषयी को मिले मुक्ति बता दे॥ 3298॥

9कृष्ण कथा मुक्त बद्ध गोविंद राधे।

10और मुमुक्षु को लक्ष्य दिला दे॥ 3299॥

11निर्गुण ब्रह्म की हैं गोविंद राधे।

12कृष्ण ही प्रतिष्ठा यह गीता बता दे॥ 3300॥

13कृष्ण तो हैं सूर्य सम गोविंद राधे।

14आतप निराकार ब्रह्म है बता दे॥ 3301॥

15“ब्रह्मणो हि प्रतिष्ठा” गोविंद राधे।

16भाव घनीभूत ब्रह्म कृष्ण हैं बता दे॥ 3302॥

17शक्ति का विकास पूर्ण गोविंद राधे।

18भगवान श्रीकृष्ण में है बता दे॥ 3303॥

19कल्पवृक्ष कामधेनु गोविंद राधे।

20चिंतामणि सब दै केपूर्ण रह बता दे॥ 3304॥

21ऐसे ही श्रीकृष्ण गोविंद राधे।

22सब कछु दै के रह अच्युत बता दे॥ 3305॥

23ब्रह्म का स्वरूप पूर्ण गोविंद राधे।

24शक्ति का विकास न्यूनतम है बता दे॥ 3306॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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