Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 284
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1केवल ऐश्वर्य गोविंद राधे।
2भगवत्स्वरूप कोई होता ना बता दे॥ 3259॥
3परमात्मा साकार गोविंद राधे।
4उनके न लीला है न परिकर बता दे॥ 3260॥
5मधुरतम स्वरूप तो है गोविंद राधे।
6भगवान श्रीकृष्ण का ही बता दे॥ 3261॥
7हरि का स्वरूप ऐसा गोविंद राधे।
8भोले भाले भव को भवानी बना दे॥ 3262॥
9हरि का स्वरूप ऐसा गोविंद राधे।
10अचर को चर चर अचर बना दे॥ 3263॥
11हरि का स्वरूप ऐसा गोविंद राधे।
12जैसा हरि का ही स्वरूप बता दे॥ 3264॥
13हरि के स्वरूप जैसा गोविंद राधे।
14कोई हुआ ना है ना होगा बता दे॥ 3265॥
15हरि का स्वरूप ऐसा गोविंद राधे।
16निज प्रतिबिम्ब लखि आपा भुला दे॥ 3266॥
17द्वारिका की मणि भित्ति गोविंद राधे।
18लखि प्रतिबिम्ब हरि मुग्ध करा दे॥ 3267॥
19हरि का स्वरूप ऐसा गोविंद राधे।
20जाको हरि ही चाहे वाको दिखा दे॥ 3268॥
21हरि का स्वरूप ऐसा गोविंद राधे।
22ब्रह्मा भी ब्रह्मज्ञान ब्रज में भुला दे॥ 3269॥
23हरि का स्वरूप ऐसा गोविंद राधे।
24सुरपति पूजा ब्रज बन्द करा दे॥ 3270॥