Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 283
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1दूरबीन ते ज्यों सूर्य गोविंद राधे।
2दीखे त्यों भक्त हरि रूप दिखा दे॥ 3247॥
3सूर्य का स्वरूप जैसे गोविंद राधे।
4दूरवीक्षण यंत्र स्पष्ट दिखा दे॥ 3248॥
5ऐसे ही योगमाया गोविंद राधे।
6ब्रह्म ते मधुर कृष्णरूप दिखा दे॥ 3249॥
7याते ब्रह्मलीन जन गोविंद राधे।
8कृष्णरूप में आपु मुग्ध हों बता दे॥ 3250॥
9ब्रह्म के हैं तीन रूप गोविंद राधे।
10ब्रह्म परमात्मा भगवान बता दे॥ 3251॥
11ब्रह्म के स्वरूप तीन गोविंद राधे।
12तीनों एक किन्तु कर्म पृथक बता दे॥ 3252॥
13जल, वारि, सलिल तो गोविंद राधे।
14एक ही के पर्यायवाची बता दे॥ 3253॥
15जल, बर्फ, भाप में तो गोविंद राधे।
16भेद है लक्षण विशेष का बता दे॥ 3254॥
17वस्तु का परिचय तो गोविंद राधे।
18होता है विशेष लक्षण ते बता दे॥ 3255॥
19ब्रह्म के तीन रूप गोविंद राधे।
20जैसे आम देखा सूँघा चूसा बता दे॥ 3256॥
21ब्रह्म के तीन रूप गोविंद राधे।
22जैसे दूध देखा छुआ पिया भी बता दे॥ 3257॥
23ब्रह्म स्वरूप मधुर गोविंद राधे।
24परमात्मा स्वरूप मधुरतर बता दे॥ 3258॥