Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 282
Reading 293 of 516 · Source nos. 3235–3246 · Source PDF 299
1कोउ कहे ब्रह्म तो है गोविंद राधे।
2सगुण अरु साकार बता दे॥ 3235॥
3उपर्युक्त तीनों मत गोविंद राधे।
4सत्य हैं ब्रह्म स्वरूप हैं बता दे॥ 3236॥
5ब्रह्म बहुरूपिया है गोविंद राधे।
6जब जैसा चाहे वैसा रूप बना दे॥ 3237॥
7एक रूप होके भी गोविंद राधे।
8बहु रूप रूप सब पूर्ण बता दे॥ 3238॥
9ब्रह्म की तो कौन कहे गोविंद राधे।
10जीव लख चौरासी रूप बना दे॥ 3239॥
11ब्रह्म का शरीर नहिं गोविंद राधे।
12ब्रह्म का शरीर ब्रह्म ही है बता दे॥ 3240॥
13निर्गुण शुद्ध ब्रह्म गोविंद राधे।
14आनन्द रूप है ज्ञानी को बता दे॥ 3241॥
15सगुण श्रीकृष्ण ब्रह्म गोविंद राधे।
16आनँदकंद स्वरूप है बता दे॥ 3242॥
17याही ते श्रीकृष्ण रस गोविंद राधे।
18निराकार ब्रह्म ते भी सरस बता दे॥ 3243॥
19साधारण मिट्टी सम गोविंद राधे।
20निर्गुण निराकार ब्रह्म बता दे॥ 3244॥
21विशिष्ट हीरा सम गोविंद राधे।
22सगुण साकार श्री कृष्ण बता दे॥ 3245॥
23आँख ते दीखे जैसे गोविंद राधे।
24सूर्य ज्ञानी को वैसे ब्रह्म बता दे॥ 3246॥