Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
ज्ञान · पृष्ठ 276
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1जग में हैं व्याप्त हरि गोविंद राधे।
2हरि को न व्यापै जग काहे बता दे॥ 3163॥
3जग में हैं व्यापक गोविंद राधे।
4फिर भी योगमाया निर्लेप बना दे॥ 3164॥
5ब्रह्म स्वरूप शक्ति गोविंद राधे।
6असम्भव को भी सम्भव बना दे॥ 3165॥
7स्वरूप शक्ति ते ही गोविंद राधे।
8बहिरंगा माया करे सृष्टि बता दे॥ 3166॥
9स्वरूप शक्ति ते ही गोविंद राधे।
10हरि के असंख्य अवतार बता दे॥ 3167॥
11हरि है विरुद्ध धर्मी गोविंद राधे।
12याते हैं विरोधी धर्म वेद में बता दे॥ 3168॥
13हरि विश्व विश्वेश गोविंद राधे।
14विश्वेश्वरेश विश्व कारण बता दे॥ 3169॥
15विश्वाधार विश्वस्थ गोविंद राधे।
16विश्व के कारण का कारण बता दे॥ 3170॥
17विश्व के जनक हरि गोविंद राधे।
18विश्व रक्षक विश्वघ्न बता दे॥ 3171॥
19नित्य का नित्य हरि गोविंद राधे।
20सब चेतनों का चेतन बता दे॥ 3172॥
21वेद में सच्च त्यच्च गोविंद राधे।
22परोक्ष अरु प्रत्यक्ष को बता दे॥ 3173॥
23निरुक्त अनिरुक्त गोविंद राधे।
24वेद में वाच्य अनिर्वाच्य बता दे॥ 3174॥