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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

ज्ञान · पृष्ठ 275

Reading 286 of 516 · Source nos. 3151–3162 · Source PDF 292

1“अथ यदिदं” मंत्र में गोविंद राधे।

2दहराकाश गुण ही ब्रह्म बता दे॥ 3151॥

3शरीर ब्रह्मपुर गोविंद राधे।

4हृदय ही है ब्रह्म का निज घर बता दे॥ 3152॥

5हृदय में दहराकाश गोविंद राधे।

6वही है ब्रह्म गुण आठ बता दे॥ 3153॥

7ब्रह्म सत्यसंकल्प गोविंद राधे।

8याते निराकार साकार बता दे॥ 3154॥

9ब्रह्म सत्यसंकल्प गोविंद राधे।

10याते निर्विशेष सविशेष बता दे॥ 3155॥

11ब्रह्म है सविशेष गोविंद राधे।

12निर्दोष नित्य परमेश्वर बता दे॥ 3156॥

13ब्रह्म सत्य संकल्प गोविंद राधे।

14याते सगुण निर्गुण भी बता दे॥ 3157॥

15ब्रह्म की स्वरूप शक्ति गोविंद राधे।

16ब्रह्म को सगुण साकार बना दे॥ 3158॥

17भक्तों की वृत्ति ते गोविंद राधे।

18निर्गुण ब्रह्म भी हो सगुण बता दे॥ 3159॥

19सर्वकल्याण गुणी गोविंद राधे।

20स्रष्टा सर्वान्तर्यामी बता दे॥ 3160॥

21ब्रह्म है मोक्षप्रद गोविंद राधे।

22व्यापक उपास्य दिव्य रूप बता दे॥ 3161॥

23अति दुःखमय जग गोविंद राधे।

24हरि व्याप्त कैसे रहते बता दे॥ 3162॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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